Arun Tiwari | 2 Mar 12:16 2015
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[IAC#RG] LEKH - Bhu Adhikar Aayojano ka Hasil - HOPE YOU WILL FIND IT JUSTIFIED TO READ, REACT AND DISSEMINATE. Regards

02.03.2015
आदरणीय/ आदरणीया
नमस्ते।

भूमि अधिग्रहण संबंधी संशोधन अध्यादेश के विरोध में आयोजित आयोजनों की समीक्षा करता लेख संलग्न है। आशा है कि उपयोगी पायेंगे।
प्रतिक्रिया और सुझावों की प्रतीक्षा रहेगी।
सादर-साभार
आपका
अरुण तिवारी
9868793799 / 011-22043335
amethiarun <at> gmail.com
-----------------------------------------------------------

संदर्भ: भूमि अधिग्रहण संशोधन अध्यादेश
भू-अधिकार आयोजनों का हासिल

भू-अधिकार के मसले पर सरकार को चेतावनी देने के आयोजनों का एक दौर संपन्न हो चुका है। वाया अन्ना, आयोजन का अगला दौर नौ मार्च को  वर्धा (महाराष्ट्र) स्थित सेवाग्राम से शुरु होगा। इन आयोजनों का जनता को हुआ हासिल अभी सिर्फ इतना ही है कि वह जान चुकी है कि कोई ऐसा कानून बना था, जिसमें उनकी राय के बगैर खेती-किसानी की ज़मीन नहीं ली जा सकती थी। मोदी सरकार ने उसमें कुछ ऐसा परिवर्तन किया है कि जिसके कारण सरकार जब चाहे, खेती-किसानी की जमीन कब्जा सकती है। संभव है कि देश के पांच करोङ भूमिहीनों में से कुछ ने यह सपना भी हासिल किया हो कि दिल्ली कें संसद मार्ग को कई बार रौंदने पर रहने और कहने को ज़मीन का एक टुकङा हासिल किया जा सकता है। तीसरे हासिल के तौर पर जनता फिलहाल राहत की सांस महसूस कर सकती है कि प्रधानमंत्री जी बिल में बदलाव के लिए तैयार हो गये हैं। इस नरमी के साथ-साथ उन्होने आंदोलनकारियों को एक गर्म संदेश भी दिया है - ’’देश संविधान के दायरे में चलेगा। किसी को कानून अपने हाथों में लेने की अनुमति नहीं दी जायेगी।’’ एक तरफ छवि को पहंुची आंच को ठंडा करने का प्रयास, दूसरी ओर आंदोलनकारियों को भङकाने वाली धमकी!

प्रधानमंत्री जी के इस अंदाज का संकेेत क्या है ? यह तो समय बतायेगा। किंतु फिलहाल इतना तो कहा ही जा सकता है मोदी सरकार ने इन आयोजनों से खोया ही खोया है; पाया कुछ नहीं। मोदी सरकार को ’उद्योगपतियों की सरकार’ प्रतिबिम्बित करने वाला संदेश देश मंे पहुंच चुका है। ’उद्योगपतियों के लिए कुछ भी करेगा’ की छवि अर्जित कर श्री मोदी ने ’सबका साथ-सबका विकास’ का नारा खो दिया है। तीर, कमान से निकल चुका है। भूमि अधिग्रहण का विरोध करने पर भूमि मालिक को तीन लाख रुपये तक का जुर्माना और छह महीने तक की सजा के प्रावधान ने शासन की नीयत और संवेदनहीनता की पोल खोल दी है। मुआवजा लेने से इंकार करने पर मुआवजा राशि सरकारी खजाने मंे जमा करा दी जायेगी और भूमि मालिक को जमीन से बेदखल कर दिया जायेगा। मुकदमा होने के बावजूद जमीन का अधिग्रहण किया जा सकेगा।ऐसे प्रावधानों के रहते आखिरकार, कोई कैसे मान सकता है कि भूमि अधिग्रहण अध्यादेश, भूमि मालिकों का हित साधने आया है।

चैतरफा नाराजगी

अध्यादेश विरोधी आयोजन के दौरान पहले राजनेताओं से मंच साझा न करे की बात और फिर बुला-बलाकर मंच पर बैठाने के तमाशे से खोया अन्ना ने भी है। किंतु सच है कि विपक्षी ही नहीं, भारतीय जनता पार्टी के साथ खङे दलों द्वारा भी संशोधन विधेयक के विरोध से खोया तो सत्तारूढ दल ने ही ज्यादा है। याद कीजिए, झारखण्ड से हेमंत सोरेन ने आर्थिक नाकेबंदी की चेतावनी दी। सोनिया, ममता, मुलायम, नीतीश, लालू, केजरीवाल से लेकर शिवसेना, अकाली दल की नाराजगी आपने सुनी ही। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और स्वदेशी जागरण मंच भाजपा के मार्गदर्शक संरक्षक संगठन हैं। संशोधन विधेयक के विरोध में ऐसे संगठनों के खुलकर सामने आने से यह संदेश भी गया कि यदि संशोधन विधेयक में जरा भी अनुकूलता होती, तो भाजपा हितैषी संगठन ही उसका विरोध क्यों करते ?

कोशिशों का झूठ-सच

दरअसल, संशोधन की भाषा इतनी सरल और स्पष्ट है कि जिसे पढकर आम आदमी भी संशोधन की मंशा और प्रभाव.. सहज ही समझ सकता है। यही कारण है कि मोदी सरकार समर्थक संगठन ही नहीं, स्वयं कई भाजपा सांसद-विधायकों को भी चिंता हो रही है कि लोगों ने सवाल किए, तो झूठ बोलने पर भी अब बचने की कोई गुंजाइश नहीं है। बावजूद इसके दुखद है कि मोदी के रणनीतिकार झूठ को सच बताने की कवायद में जुट गये हैं। वे कह रहे हैं कि संशोधन किसानों के हित में है। भाजपा के पदाधिकारी यह प्रचारित करने में जुट गये कि यदि संशोधन न किए जाते, तो किसानों को मुआवजा कम मिलता; गांव के गरीब के विकास की प्रक्रिया बाधित होती। सरकार गरीब के हित में रोजगार के लिए जो करना चाहती है, उसमें मुश्किल आयेगी। यदि सहमति लेकर भूमि अधिग्रहण करना पङा, तो देश की रक्षा परियोजनाओं की सुरक्षा को लेकर मुश्किलात खङी हो जायेंगी। हालांकि प्रधानमंत्री ने राष्ट्रपति के अभिभाषण पर वक्त देते हुए यह दिखाने की भरसक कोशिश की है कि किसानों के लिए कोई भी सुधार करेंगे; किंतु श्री अरुण जेटली द्वारा सदन में दिए वक्तव्य से लेकर भाजपा सचिव श्रीकांत शर्मा वर्मा द्वारा लिखे लेख का संदेश यही है। भूमि अधिग्रहण कानून में हुए संशोधन का जिन्न जंतर-मंतर से निकलकर देश में नुमाया न होने पाये। चेतावनी यात्रा के जंतर-मंतर पहुंचने से पहले ही मोदी सरकार द्वारा इसकी रोकथाम की कोशिश का संदेश भी यही है।

सरकार की बाजीगरी

गौर करने की बात है कि भाजपा के रणनीतिकारों ने पहले-पहल एक विनम्र संदेश देने की कोशिश की कि वह एक लोकतंात्रिक सरकार है। अतः सुझावों का स्वागत करेगी। मीडिया ने इसे ऐसे प्रचारित किया, मानो अन्ना के आंदोलन के समक्ष मोदी सरकार झुक गई हो। कितु जो लोग मोदी के मुख्यमंत्रित्व काल से परिचित थे, वे जानते थे कि सरकार द्वारा दर्शाई विनम्रता तात्कालिक है; यही हुआ। गृहमंत्री राजनाथ सिंह जी ने किसान संगठन प्रतिनिधियों से क्या सुझाव लिए और क्या आश्वासन दिए; मालूम नहीं। किंतु इतना साफ दिखा कि राजनाथ सिंह जी ने जैसे ही कुछेक किसान संगठनों से बातचीत का एक दौर संपन्न किया, सरकार का रवैया बदल गया। 24 फरवरी तक जो सरकार रक्षात्मक नजर आ रही थी, वह अचानक आक्रामक हो गई। सर्वदलीय चर्चा के विचार को कूङे के डिब्बे में डाल दिया। वैकेया नायडू भले ही कहते रहे कि सुझावों पर विचार होगा; किंतु पार्टी प्रवक्ताओं के तेवर तल्ख हो गये।

अफवाहांे का जंतर-मंतर

एक ओर दुष्प्रचार शुरु हुआ, मानो भूमि अधिग्रहण के मुद्दे पर आवाज बुलंद करना, किसान संगठनों का घोषित एकाधिकार हो और अन्ना उसमें अनाधिकार चेष्टा कर रहे हों। अन्ना की आलोचना करने वाले बैनर जंतर-मंतर की सङक किनारे रातो-रात उग आये। एक ही मसले पर समानान्तर कई मंच बन गये। कई कलम और कैमरों ने मामले को किसान संगठन बनाम एन जी ओ बनाकर भी पेश किया। किसी ने कहा कि इन लोगों ने अन्ना को सिर्फ उपयोग किया है। किसी ने कहा कि अन्ना के मंच पर कांग्रेसियों का जमावङा था, तो किसी ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अनुगामी संगठनों के प्रतिनिधियों से अन्ना की मुलाकातों की खबरें फैलाई। जरा सोचिए! ऐसी अफवाहों का बाजार गर्म करने का एकमेव मकसद भू-अधिकार से जुङे मसले पर एकजुट संगठनों के बीच मतैक्य पैदा करने के अलावा भला और क्या हो सकता है ?

नीयत पर सवाल

संशोधन के पक्ष में भाजपा के सफाई प्रचार पर सवालिया निशान लगाते सवाल कई हैं। पहला, सरकार यह तय करने वाली कौन होती है कि कोई परियोजना लोगों के हित में है या नहीं ? दूसरा, स्थानीय लोगों को यह तय करने देने में देश का क्या नुकसान है कि जिस परियोजना के लिए सरकार भूमि अधिग्रहण करना चाहती है, वह स्थानीय लोगों के हित मे है या नहीं ? तीसरा, क्या सरकार यह समझती है कि गांव के लोग इतने मूर्ख हैं कि यदि परियोजना स्थानीय लोगों के हित में हुई, तो भी वे भूमि अधिग्रहण के लिए अपनी ज़मीन देने को तैयार नहीं होंगे ? हित में होने के बावजूद लोग परियोजना के लिए ज़मीन नहीं दें; यह तभी हो सकता है जब या तो भूमिधरों की कोई मज़बूरी हो अथवा वे उस परियोजना को न चाहते हों। जाहिर है कि परियोजना यदि स्थानीय लोगों की मजबूरी का निराकरण करने, वाजिब लाभ देने तथा दूरगामी हित साधने वाली हुई, तो लोग सहमत न हों; ऐसा हो नहीं सकता। अपने भारत देश ऐसे लाखों उदाहरण से भरा पङा हैं, जहां भूमिधरांे ने सार्वजनिक उपयोग के लिए बिना कोई पैसा लिए ज़मीनें दीं। अतः सहमति की शर्त को हटाना; अपने आप में भूमि अधिग्रहण कर्ता की नीयत पर शक पैदा करता है।

सहमति शर्त जरूरी क्यों ?

सहमति की शर्त इसलिए भी जरूरी है, ताकि लोगों अपनी भूमि के लेन-देन की शर्तें स्वयं तय करने के लिए आजाद बने रहें। इस शर्त का एक बङा लाभ यह होगा कि यदि लोग समझदार होंगे तो परियोजना और उसके संचालक, भूमि अधिग्रहण करने के बाद भी स्थानीय जन हितैषी बने रहेंगे। यह नहीं होगा कि बिजली परियोजना लगाते वक्त वादे करें कि जिनकी जमीन गई, उन्हे 24 घंटे बिजली मिलेगी और बाद में लोग सिर्फ तार ही निहारते रह जायें। भूमि अधिग्रहण के वक्त कहा जाये कि फैक्टरी प्रदूषण नहीं करेेगी; बाद में उसकी परवाह ही न करे। उत्तर प्रदेश के सोनभद्र में सरकारी ताप विद्युत घर के कारण आदिवासियों की जमीनें भी गईं और अब सेहत का भी सत्यानाश हो रहा है। चाहे खनन उद्योग हो या कोई फैक्टरी; एक बार जमीन हासिल हो जाने के बाद स्थानीय लोगों की जिंदगी व हित से खिलवाङ करने के कारनामें को देखते हुए जन-सहमति का प्रावधान को लागू करना और जरूरी है। खासकर, खनन और उद्योग क्षेत्र के लिए गये अधिग्रहण में ऐसे खतरे ज्यादा होते हैं।
 
कुछ जरूरी सवाल

भूमि अधिग्रहण से जुङा एक और महत्वपूर्ण पहलू यह है कि संशोधन पेश करने से पहले भारत की कुल भूमि में उद्योग, खेती, नगर, पानी, जंगल की भूमि का अनुपात तय करना जरूरी नहीं  ? क्या यह देखना जरूरी नहीं कि किस इलाके में निर्माण हो और देश के किस भूगोल को निर्माण से मुक्त रखा जाये ? पेश आंकङों के मुताबिक, अधिग्रहित की गई कितनी ही भूमि ऐसी है, जो कई साल बीत जाने के बावजूद आवंटित ही नहीं की गई। ऐसी अधिग्रहित की गई भूमि का रकबा भी  कम नहीं, आवंटित होने के बावजूद आवंटी जिसका सालों-साल उपयोग नहीं कर सके। क्या यह जरूरी नहीं कि सरकार पहले से अधिग्रहित भूमि के उपयोग को प्राथमिकता बनाये ? क्या औद्योगीकरण और शहरीकरण की कोई सीमा रेखा बनाना जरूरी नहीं ? यही न करने का नतीजा है कि देश तमाम पलायन, पर्यावरण और रोजगार में होड की अनेक समस्याओं से जूझ रहा है।

खेती की जमीन पर उद्योग लगाने की जिद्द को लेकर भी एक प्रश्न तो है ही। इस प्रश्न के उत्तर में भाजपा प्रवक्ता ने प्रश्न दागा कि बंजर भूमि पर उद्योग लगाया, तो पानी कहां से आयेगा ? प्रश्न उठाते हुए वह शायद भूल गये कि पानी की कमी से ही नहीं, जलभराव के कारण भी जमीन बंजर होती है। कृषि भूमि कब्जाने की जिद्द के पीछे का असली उद्देश्य, कृषि भूमि की कीमतों में हो रही बेशुमार वृद्धि है। बिना उद्योग चलाये मुनाफा कमाने का इससे बेहतर नुस्खा और क्या हो सकता है ? कृषि और उसके प्रसंस्करित उत्पादों के बाजार पर कब्जे को लेकर बङी कंपनियों में होङ भी इसका एक कारण है। दुखद है कि हमारे जिस राष्ट्रपिता द्वारा प्रतिपादित सिद्धांतों को आगे रखकर दुनिया सर्वजन हिताय-सर्वजन सुखाय का सपना देखती है, उसी गांधी के देश मंें ’सबका साथ-सबका विकास’ का नारा खोखला साबित होने की ओर अग्रसर है। यह न होने पाये।
.......................................................................................................................................................
 

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Sandeep Nagpal | 1 Mar 07:17 2015
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RE: [IAC#RG] Fwd: Get support by missed call for social issues

Certainly yes...

I have couple of issues in mind. Will raise it through appropriate channel..

Would need support from all of you as well..

Best Regards
Sandeep

On Mar 1, 2015 11:25 AM, "Reformist NavinPandya" <proactive-democracy-PkbjNfxxIARBDgjK7y7TUQ@public.gmane.org> wrote:
Hello,

Namaste.

How about trying Social Media for Social Issues?

Date: Fri, 27 Feb 2015 23:13:40 +0530
From: casandeepnagpal-Re5JQEeQqe8AvxtiuMwx3w@public.gmane.org
To: indiaresists-3hfIC0tI0F+k/GrYEfjPQg@public.gmane.org
CC: sroy.mb-Re5JQEeQqe8AvxtiuMwx3w@public.gmane.org
Subject: [IAC#RG] Fwd: Get support by missed call for social issues

Dear All,

I had sent appended mail to Sarabjit and expecting some response soon.

Meanwhile, can anyone else please help me on the subject.

Best Regards
Sandeep Nagpal

---------- Forwarded message ----------
From: "Sandeep Nagpal" <casandeepnagpal-Re5JQEeQqe8AvxtiuMwx3w@public.gmane.org>
Date: Feb 27, 2015 12:07 AM
Subject: Get support by missed call for social issues
To: <sroy.mb-Re5JQEeQqe8AvxtiuMwx3w@public.gmane.org>
Cc:

Dear Sarabjit,

I want to work upon few social issues and want to raise my voice till top level people, who can actually take the decision and can take corrective steps. But as you know without support of general public it is difficult (even to believe) that my voice will be heard. I remember that IAC started one campaign during its movement in the year 2012 (when Anna ji was on fast), we and other public supported IAC by missed call.

Can you please guide on the process of showing the support by public by giving missed calls. How does it actually functions and what is the mechanism to work with it?

Thanks
Best Regards,
Sandeep Nagpal


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Sarbajit Roy | 28 Feb 19:45 2015
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Re: [IAC#RG] Get support by missed call for social issues

Dear CA Sandeep

Sorry for not replying earlier.

I was not a party to the IAC's earlier missed call initiatives. It was
carried out by NetCore Mumbai. Later on I protested it.

http://www.iacmumbai.info/2014/03/08/iac-condemns-aap-sale-of-iac-members-mobile-numbers
http://scroll.in/article/how-aap-got-your-phone-number-and-why-namo-might-have-it-too/?id=658139
http://www.mumbaimirror.com/columns/columnists/ajit-ranade/Missed-Call-Great-Indian-trick/articleshow/16142093.cms

"What Balwant Singh perhaps did not know was that by calling the
number not only was he registering his support, he was also giving
away consent for getting calls and text messages in the future.
Calling this the ‘Great Indian trick,’ Ajit Ranade wrote in Mumbai
Mirror that the Mumbai-based company that was managing IAC's campaign,
Netcore Solutions Pvt Ltd, had used a software which could convert a
missed call into consent for receiving future calls and text messages,
as mandated by the Department of Telecom."

Sarbajit

On 2/27/15, Sandeep Nagpal <casandeepnagpal@...> wrote:
> Dear Sarabjit,
>
> I want to work upon few social issues and want to raise my voice till top
> level people, who can actually take the decision and can take corrective
> steps. But as you know without support of general public it is difficult
> (even to believe) that my voice will be heard. I remember that IAC started
> one campaign during its movement in the year 2012 (when Anna ji was on
> fast), we and other public supported IAC by missed call.
>
> Can you please guide on the process of showing the support by public by
> giving missed calls. How does it actually functions and what is the
> mechanism to work with it?
>
> Thanks
> Best Regards,
> Sandeep Nagpal
>
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Manohar Sharma | 27 Feb 15:22 2015
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Re: [IAC#RG] Help and guidance needed.

YES u can context Mr., Krishnarao 9821588114.

On Fri, Feb 27, 2015 at 2:51 PM, B.D. Vakharia <prof.vakharia-Re5JQEeQqe8AvxtiuMwx3w@public.gmane.org> wrote:
This message is eligible for Automatic Cleanup! (prof.vakharia-Re5JQEeQqe8AvxtiuMwx3w@public.gmane.org) Add cleanup rule | More info

In connection with repairs work done by Mhada in mumbai there is something fishy.

there is a certain amount of budget sanction by Mhada for repairs which is not sufficient,

Contractor and Architect suggest to get MLA fund for additional repairs.

Tenants are asked to contribute 40% of estimated extra cost to get 60% from MLA fund.

this 40% is the bribe to give to MLA's agents.

Can somebody give proper guidance. ?   



B. D. Vakharia

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Sarbajit Roy | 28 Feb 18:41 2015
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[IAC#RG] NOTICE-IN-LAW Re: "Smart E-book of Environment Ministry"

1) To: Mr. Parkash Javed Kar
Union Minister, MoEF/GoI

2) Mr. Arvind Kejriwal,
Chief Minister, GoNCTD

cc: for record
a) Secretary MoEF
b) Chief Secretary GNCTD

28-Feb-2015

Dear Sirs,

NOTICE-IN-LAW

Please stop sending these impersonating messages as below.

Please take NOTICE-IN-LAW that public servants are prohibited from
using GMAIL by Hon'ble Delhi High Court, so I doubt you and will
report you. Please also take notice that Hon'ble Delhi High Court had
additionally disallowed use of FOREIGN CONTROLLED social media sites
like Facebook and Orkut by Govt. Depts as it is in contravention of
Public Records Act. The case no. is WP-C-3672/2012 "K.N.Govindacharya
v. UoI and Ors. "

If indeed you are Mr. JavedaKar Cabinet Minister for MoEF then
additionally take notice that one Mr. Arvind Kejriwal has contacted
you on 16.02.2015 via Facebook to get his chosen officer Mr. Saniiv
Chaturvedi IFS released from your Ministry and assigned to Delhi Govt
as OSD. If such is the case and you act on the request, I shall have
to take you all before the Delhi High Court for contempt and
contravention of Official Secrets Act 1923.

A copy of the said letter dated 16.02.2015 to you from Mr.Kejriwal as
downloaded from Mr Arvind Kejriwal's Facebook page is attached. I have
also cautioned Mr. Kejriwal on his Facebook page and reported this
photo to Facebook as a contempt of court.

So kindly take heed of my warning and cautions.

I am marking CCs of this email to
a) Secretary MoEF
b) Chief Secretary GNCTD

for their notice as they are likely to be arraigned should you persist
in your anti-national ways.

sincerely

Er. Sarbajit Roy
B-59 Defence Colony
New Delhi 110024

Tel:: 011-24334262

---------- Forwarded message ----------
From: PRAKASH JAVADEKAR <pjavadekar@...>
Date: Fri, Feb 27, 2015 at 4:42 PM
Subject: "Smart E-book of Environment Ministry"
To: ashutosh javadekar <ashudentist@...>

Dear Sir/Madam,

I am happy to share the link of the Smart E-book of the Ministry of
Environment, Forest and Climate Change that I had launched on February
23, 2015. The first of its kind Smart e-book showcases the initiatives
of the Ministry in the last nine months. It can be accessed through
the following link http://newzstreet.tv/moef.  This link is also
available on the MoEFCC website www.moef.gov.in.

This e-book gives maximum impact with least text using videos, audio
and images. It is also easily readable on all mobile platforms such as
iOS, Android and Windows.  The entire e-book is friendly for
specially-abled users and it allows users to share its content on
various social media platforms such as Facebook, Twitter and Google
Plus.

I am sure you will like it and forward the link to your friends.

With warm regards,

--

-- 
Yours truly,
Prakash Javadekar,
Minister of State (IC) for
Environment, Forest & Climate Change
Govt. of India
Post: "indiaresists@..."
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[rti_india] Re: Meeting of RTI Activists

 

Hello Friends,

Namaste.

Right to Information has turned in to Fight for Information.

Wish the Meeting grand success.

Best Regards,

Navin Pandya

On 2/28/15, Veeresh Bellur <veeresh.bellur-Re5JQEeQqe8AvxtiuMwx3w@public.gmane.org> wrote:
> DEAR FRIENDS
>
> A meeting of RTI activists is arranged on 6th march 2015 at Hotel
> Panchavati. 54. 17th cross. M C Layout. VIJAYANAGAR. BSNGALORE at 11.30.am.
> Mr. Bhaskar Prabhu. Mahithi Adhikarmanch. Mumbai will be sharing his
> Msharashtra experiences. Pl join us and strengthen RTI movement.
>
> Veeresh
> Mahithi Hakku Adhyayana Kendra
> 54. 17th Cross. MC Layout. Vijayanagar. Bangalore.
>
> Ph 9448704693
>

--
*Sarve Bhavantu Sukhin: Sarve Santu Niramaya: l Sarve Bhadrani Pashyantu Ma
Kashchid Dukhbhag Bhavet ll Om Shanti: Shanti: Shanti:*

__._,_.___
Posted by: Reformist Navin <navinpandya1954-Re5JQEeQqe8AvxtiuMwx3w@public.gmane.org>
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.

__,_._,___
Sandeep Nagpal | 27 Feb 18:43 2015
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[IAC#RG] Fwd: Get support by missed call for social issues

Dear All,

I had sent appended mail to Sarabjit and expecting some response soon.

Meanwhile, can anyone else please help me on the subject.

Best Regards
Sandeep Nagpal

---------- Forwarded message ----------
From: "Sandeep Nagpal" <casandeepnagpal-Re5JQEeQqe8AvxtiuMwx3w@public.gmane.org>
Date: Feb 27, 2015 12:07 AM
Subject: Get support by missed call for social issues
To: <sroy.mb-Re5JQEeQqe8AvxtiuMwx3w@public.gmane.org>
Cc:

Dear Sarabjit,

I want to work upon few social issues and want to raise my voice till top level people, who can actually take the decision and can take corrective steps. But as you know without support of general public it is difficult (even to believe) that my voice will be heard. I remember that IAC started one campaign during its movement in the year 2012 (when Anna ji was on fast), we and other public supported IAC by missed call.

Can you please guide on the process of showing the support by public by giving missed calls. How does it actually functions and what is the mechanism to work with it?

Thanks
Best Regards,
Sandeep Nagpal

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B.D. Vakharia | 27 Feb 10:21 2015
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[IAC#RG] Help and guidance needed.

In connection with repairs work done by Mhada in mumbai there is something fishy.

there is a certain amount of budget sanction by Mhada for repairs which is not sufficient,

Contractor and Architect suggest to get MLA fund for additional repairs.

Tenants are asked to contribute 40% of estimated extra cost to get 60% from MLA fund.

this 40% is the bribe to give to MLA's agents.

Can somebody give proper guidance. ?   



B. D. Vakharia
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Sarbajit Roy | 27 Feb 13:55 2015
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[IAC#RG] Wikileaks India and Registrar General Supreme Court

To:
IACians

I am please to announce that India Against Corruption's latest innovation "Wikileaks India" went online 11 hours ago.

Unfortunately because of IAC's powerful reputation in anti-corruption, the website is somehow the #1 Google search result for "Corrupt Registrar General Supreme Court" which Whistle Blower Babubhai Vaghela emailed to the new website a few hours back.

So all our esteemed whistle blowers who use our password protected new online property may kindly draft their emails and uploads very very carefully so we don't inadvertently offend anybody.

Sarbajit



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Sarbajit Roy | 25 Feb 21:27 2015
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Re: [IAC#RG] Fwd: Death Threats to RTI Activist Vishwas Bhamburkar

Veeresh

Thanks. Other old time / veteran RTI activists, like Lalit Mohan
Sharma in Delhi are also under threats and have been beaten black and
blue by cops and false FIRs registered using police informers.

I noticed that Vishwas had posted on his Facebook page,
https://www.facebook.com/vishwas.bhamburkar/posts/10152404723467289

This is not enough. So after getting you email I have booked the domain name
HTTP://WIKILEAKS.ORG.IN

IAC shall use this to put up a WIKI where citizens we trust can "leak"
ie. upload their RTI obtained data into public domain.

Alternatively perhaps we shall work out some sort of PASSWORD
encrypted file upload so that if anything happens to IAC's activists
their data is still available. The password shall be technologically
shared with 6 or 8 trustees in a manner that the cops cannot torture
say 2 or 3 of us to extract it or the Controller of Cyber Authoritys
cannot force any single person to decrypt it without a court order.

IACians and RTI activists may give ideas.

Sarbajit

On 2/25/15, Veeresh Malik <veereshmalik@...> wrote:
> I am filing -
>
> 1) A formal report on this with "Interact with PMO"
> 2) A Public Grievance with MoHA.
> 3) Another Public Grievance with State Govt of MH.
> 4) Doing an article on this variously.
>
> Anything else please?
>
> Best / Veeresh
>
> On 25 February 2015 at 12:51, Sarbajit Roy <sroy.mb@...> wrote:
>
>> My cell is 08010205897. The other one was disconnected due to crank
>> calls and some issues with Reliance.
>>
>> On 2/25/15, Veeresh Malik <veereshmalik@...> wrote:
>> > Please meet each other.
>> >
>> > 9898679997 - VB
>> > 9311448069 - SR
>> >
>> > On 24 February 2015 at 00:24, Sarbajit Roy <sroy.mb@...> wrote:
>> >
>> >> Dear Members
>> >>
>> >> What should we do for this ? Does anyone know where to contact Vishwas
>> >> ?
>> >>
>> >> Sarbajit
>> >>
>> >> ---------- Forwarded message ----------
>> >> From: Vishwas Bhamburkar <vishwas@...>
>> >> Date: 23 February 2015 at 19:53
>> >> Subject: Re: Update - Court Hearing of Mumbai Airport.
>> >> To: media@...
>> >>
>> >> And I forgot to add the annexures - the complaint filed with the
>> >> Vastrapur Police Station last evening. The email ID of the Police
>> >> Station and the Commissioner were wrong, so had to go and deliver the
>> >> complaint personally.
>> >>
>> >> And a copy of the precipe I have submitted to the Court today.
>> >>
>> >> Vishwas Bhamburkar
>> >>
>> >> On 23-Feb-2015, at 7:31 pm, Vishwas Bhamburkar <
>> vishwas@...>
>> >> wrote:
>> >>
>> >> As you all are aware, I have got these death threats. I decided not to
>> >> cow down to them and would take it on my chin, whatever happens.
>> >>
>> >> Without letting anyone know my precise location (something that I'll
>> >> probably continue doing) I filed a police complaint last evening at
>> >> the Vastrapur Police Station, Ahmedabad and soon thereafter left for
>> >> Mumbai. This morning I was in Court and mentioning the matter, I
>> >> informed the Court of the threat to my life and asked for an
>> >> advancement.
>> >>
>> >> Initially, there was a reluctance on the part of the judges to advance
>> >> the date; Justice More even asked me what would happen to me. I
>> >> replied that I did not know, not saying that I did  not ask those who
>> >> had come to threaten me whether they would chop me, behead me, burn me
>> >> or shoot me or if they had anything else in mind. Justice More aslo
>> >> asked me what would happen??!! I simply said, "I have been told I will
>> >> not survive. What happens
>> >> then?" That closed the argument and the date of hearing was advanced
>> >> to 02.03.2015. I have been instructed to inform the other parties
>> >> which I have already done.
>> >>
>> >> There might be a few aces up my sleeve yet; some documents I have got
>> >> hold of this time from the Urban Development Department, Government of
>> >> Maharashtra. Needless to say, they are related to the Mumbai Airport.
>> >>
>> >> Vishwas Bhamburkar
>> >>
>> >> Post: "indiaresists@..."
>> >> Exit: "indiaresists-unsubscribe@..."
>> >> Quit: "https://lists.riseup.net/www/signoff/indiaresists"
>> >> Help: https://help.riseup.net/en/list-user
>> >> WWW : http://indiaagainstcorruption.net.in
>> >>
>> >
>>
>
Post: "indiaresists@..."
Exit: "indiaresists-unsubscribe@..."
Quit: "https://lists.riseup.net/www/signoff/indiaresists" 
Help: https://help.riseup.net/en/list-user
WWW : http://indiaagainstcorruption.net.in
Enakshi Ganguly Thukral | 24 Feb 14:05 2015

[IAC#RG] Fwd: Pre Budget Article by HAQ: Centre for Child Rights


Dear All

Greetings!

The Union Budget for 2015-16 will be presented on February 28th, 2015. 

HAQ: Centre for Child Rights has been undertaking analysis of budgetary allocations for children every year. This year, as we at HAQ, get ready to critically analyse the Union budget again we have prepared an article and highlighted the key points from a child rights perspective. 

The government has already highlighted its priority areas for the budget and has talked about significant tax reforms, smart cities, skill development, women’s security, budget for the social sector, among other things. But this time they will be expected to be more cautious in their planning as the “Aam Aadmi” can no longer be ignored!

Among the “Aam Aadmi” is the “Aam Bachha”, whose needs require special attention since budget analysis undertaken by HAQ: Centre for Child Rights and other groups working towards strengthening governance and accountability have shown how children’s rights have remained on the periphery, while they constitute 40% of the country’s population.

You can read the article titled 'POLITICS, PAISA OR PRIORITIES: WHERE WOULD CHILDREN FIT INTO THE 2015-16 UNION BUDGET?' on our website. Please click on http://www.haqcrc.org/blogs/politics-paisa-or-priorities to access the article.

I do hope that you will find the information useful. Your comments and suggestions will be appreciated.


Regards

Anisha Ghosh

--
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To unsubscribe from this group and stop receiving emails from it, send an email to prochildcoalition+unsubscribe-/JYPxA39Uh5TLH3MbocFFw@public.gmane.org.
For more options, visit https://groups.google.com/d/optout.



--
Co- Director
HAQ Centre for Child Rights
B-1/2, Ground Floor
Malviya Nagar, New Delhi 110017
Office: +91.1126673599
http://www.haqcrc.org/
Twitter: enakshihaq





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